अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली के बहुउद्देशीय सभागार में आज स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और जन-कल्याण को समर्पित एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत हर्ष और गौरव के माहौल में हुआ।
मुख्य अतिथियों का स्वागत और गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम की शुरुआत द्वीपप्रज्ज्वलन के साथ हुआ वहीं एम्स की निदेशक डॉ. अनिता जैन ने स्वागत उद्बोधन देते हुए मुख्य अतिथियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर तेलंगाना के राज्यपाल महामहिम श्री शिव प्रताप शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री (खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग) डॉ. मनोज कुमार पांडे ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। डॉ. जैन ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय और मार्गदर्शक उपस्थिति से संस्थान को नई ऊंचाइयां मिल रही हैं।
एम्स: 15 जनपदों के लिए जीवन रेखा और 5 लाख ओपीडी का मील का पत्थर
कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडे ने मुंशीगंज गोलीकांड और रायबरेली की ऐतिहासिक ऋषियों-तपस्वियों की भूमि का स्मरण करते हुए कहा कि एम्स अब केवल रायबरेली ही नहीं, बल्कि आसपास के कम से कम 15 जनपदों के लिए जीवन रेखा बन चुका है। उन्होंने यह भी साझा किया कि एम्स रायबरेली में अब तक 5 लाख से अधिक ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी की जा चुकी हैं, जो इसकी निरंतर प्रगति का प्रमाण है।
मशीन और दवा से अधिक महत्वपूर्ण डॉक्टर का स्वभाव"
मुख्य अतिथि एवं तेलंगाना के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में चिकित्सकों और चिकित्सा छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि "मशीन और दवा से ज्यादा प्रभाव डॉक्टर के स्वभाव का होता है। मरीज आपके सौम्य व्यवहार और संवेदना से ही आधा रोगमुक्त हो जाता है।"
उन्होंने हिमाचल प्रदेश के अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए युवाओं से अपील की कि वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहें और राष्ट्र सेवा के प्रति पूरी तरह संकल्पित रहें।
एआई (AI) के सतर्क प्रयोग और 'उन्नत भारत' का संकल्प
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए राज्यपाल महोदय ने कहा कि आधुनिक तकनीक और AI चिकित्सा व अनुसंधान के क्षेत्र में अत्यंत लाभकारी हैं, किंतु इनका प्रयोग पूरी सतर्कता और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। स्वामी विवेकानंद के विचारों को याद करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि देश की 67 प्रतिशत युवा शक्ति के बल पर भारत वर्ष 2047 से पहले एक 'उन्नत राष्ट्र' के रूप में स्थापित हो जाएगा।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ एवं सभी ने चिकित्सा शिक्षा में नवाचार, जन-कल्याण और एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।




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